SC ने कहा– भोजशाला में दोपहर 12 बजे तक पूजा, फिर नमाज होगी, अखंड पूजा वाली याचिका पर फैसला

धार। धार जिले की भोजशाला में बसंत पंचमी पर यानी शुक्रवार को पूजा और नमाज दोनों हो सकेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नमाज के लिए दोपहर 1 से 3 बजे तक परिसर में अलग और विशेष क्षेत्र उपलब्ध कराया जाएगा, जहां आने-जाने के लिए अलग मार्ग होंगे, ताकि नमाज शांतिपूर्ण ढंग से हो सके। वहीं, हिंदू समुदाय को भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए परिसर में अलग स्थान दिया जाएगा।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने बसंत पंचमी पर दिनभर सरस्वती पूजा की अनुमति के लिए 20 जनवरी को याचिका दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया है। मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने की।
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हिंदू पक्ष ने कहा- बसंत पंचमी पर दिनभर पूजन होंगे
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि बीते कुछ वर्षों से बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है। कल बसंत पंचमी है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा, हवन और पारंपरिक अनुष्ठान होंगे।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की व्यवस्था की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। प्रशासन और ASI को निर्देश दिए गए हैं कि दोनों समुदायों के धार्मिक आयोजनों में किसी तरह की बाधा न आए और शांति बनी रहे।

मस्जिद पक्ष बोला- नमाज के बाद परिसर खाली कर देंगे
मस्जिद पक्ष के वकील ने कहा कि दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज अदा करने के बाद परिसर खाली कर दिया जाएगा। हिंदू पक्ष की ओर से सुझाव दिया गया कि नमाज शाम 5 बजे के बाद कराई जाए, ताकि पूजा निर्बाध चल सके। इस पर मस्जिद पक्ष ने स्पष्ट किया कि जुमे की नमाज का समय बदला नहीं जा सकता। अन्य नमाजों के समय में बदलाव संभव है।
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कलेक्टर बोले- बैठक करके रणनीति बनाएंगे
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने भोजशाला पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। कलेक्टर ने कहा- वकील आदेश को पढ़ रहे हैं। आधिकारिक रूप से आदेश मिलने के बाद ज्यादा जानकारी दे सकेंगे। फिर सभी के साथ बैठक करके आगे की रणनीति पर बात करेंगे।

दिग्विजय बोले- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करें
कांग्रेस से राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा- फैसले का स्वागत करता हूं। यह व्यवस्था साल 2003, 2013 और 2016 में कायम रखी गई थी, जिसमें सामान्य तौर पर मंगलवार को हिंदू पूजा करते हैं। शुक्रवार को मुस्लिम जाते हैं।
जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती है, तो दोपहर 12 बजे से पहले हिंदू समाज के लोग पूजा करने जाते हैं। एक से तीन बजे तक मुस्लिम नमाज पढ़ते हैं। फिर तीन से हिंदू समाज के श्रद्धालु भी फूल चढ़ा सकते हैं। अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करे।
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